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साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल

आयोजनों से देष के हिंदी जगत में अपनी प्रतिष्ठा को और प्रदेष की गौरवमयी परंपरा को रेखांकित किया जाता है। इससे एक और सृजनषील अध्येता और युवा प्रतिभा को आपस में प्रत्यक्ष साक्षात्कार का अवसर मिलता है, अपने विचारों के माध्यम से कालजयी रचनाकारों के विविध पक्ष उजागर होते है इन आयोजनों में देष के ही नहीं विदेषो से आकर साहित्यकारों और शोधार्थीयों ने अपने ज्ञान की विषिष्टता को समझा और समझाया है।


साहित्य अकादमी ने देष के हिंदी साहित्य को प्रोत्साहन और संरक्षण देने के लिए, साहित्य आयोजनों में कई महत्त्वपूर्ण समारोह, परिचर्चा और संगोष्ठियाँ आयोजित की हैं। कालजयी रचनाकारों के नाम पर प्रतिवर्ष इन समारोहों, परिचर्चाओं और गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है।

अकादमी के विभिन्न आयोजन जो प्रतिवर्ष आयोजित हैं, वे इस प्रकार है-

आयोजन -

+ स्मृति समारोह

  • भवानी प्रसाद मिश्र समारोह- प्रांरभ वर्ष 2002, यह नई कविता पर केंद्रित आयोजन है।
  • मुक्तिबोध समारोह- प्रारंभ वर्ष 1987
  • सुभद्राकुमारी चैहान समारोह- प्रारंभ वर्ष 1982
  • बालकृश्ण शर्मा ‘नवीन’ समारोह- प्रारंभ वर्ष 1982
  • माखनलाल चतुर्वेदी समारोह- प्रारंभ वर्ष 1987
  • पदमाकर समारोह-प्रारंभ वर्ष 1988
  • डॉ. रामविलास शर्मा समारोह
  • केषव जयंती समारोह- प्रारंभ वर्ष 1987, यह उत्सव प्रतिवर्ष रामनवमी के अवसर पर ओरछा में आयोजित किया जाता है।

+ व्याख्यान

  • परसाई व्याख्यानमाला- प्रारंभ वर्ष 1986, यह व्यंग्य और गद्य विधा पर केंद्रित आयोजन है।
  • महर्षि अरविंद-व्याख्यान
  • विवेकानंद समारोह-व्याख्यान माला
  • शरद जोषी समारोह
  • नरेष मेहता समारोह
  • भूषण समारोह
  • पद्माकर समारोह
  • मैथिलीषरण गुप्त समारोह 2005-2006
  • श्रीकृष्ण सरल समारोह 2005-2006

+ उत्सव

  • निमाड़ उत्सव- प्रारंभ वर्ष 1995, लोककवियों पर केंद्रित यह उत्सव महेष्वर में आयोजित किया जाता है।

+ संवाद

  • निरंतर- प्रारंभ वर्ष 2000, रचना पाठ और संवाद की मासिक श्रृंखला।
  • रचना संवाद एवं कार्यषाला।

+भागीदारी

  • विष्व हिंदी सम्मेलन।
  • पुस्तक मेलो, पुस्तक प्रदर्षनी।

+ नई योजना

  • दक्षिण एषियाई देषों के साहित्यकारो का सम्मेलन- साहित्य आज और कल।
  • मध्यप्रदेष की साहित्य संस्था का सम्मेलन।
  • राजेंद्र अनुरागी सम्मान कविता के प्रादेषिक पुरस्कार की स्थापना।
  • प्रदेष एवं देष के साहित्यकारों को आमंत्रित कर साहित्य अकादेमी अपने अपने कार्यक्रमों, प्रकाषनों और योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा करती है। जिससे पारदर्षी माहौल बनाने में मदद मिलती है। अब तक साहित्य अकादेमी सहृदय प्रस्ताव और सुझावों का सदा स्वागत करती रही है भविष्य में यही कामना करती है।